Monday, June 17, 2013

नीले विस्‍तार में एक बूँद- कुछ बिम्ब

नीले विस्‍तार में

ना जाने
उसके मन में
क्‍या आई
कि अचानक
उसने मल दी
नीले विस्‍तार में
चहुंदिश कालिख !

अब तक
है सदमे में
बेचारा चॉंद
उस कालिख में
छुपाता अपना मुख ।
० ० ०  


एक बूँद

ना भीगे
दरख्त
ना पत्ते
ना ही कहीं
पडी फुहारें

फकत
एक बूँद
ऑंख से तेरी
गिरी छलक कर
हो गया मैं
पानी-पानी।
० ० ०
चित्र सौजन्य- गूगल

8 comments:

  1. namaskaar
    ye ve kavitaae hai jo ek baar padhne k baad chhod di jaaye , ek baar me man nahi tript hotaa , man k chhune wali hai , hardik badhai , umdaa kavitaaon k liye

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  2. बहुत खूबसूरती से उकेरे हैं आपने बिम्‍ब।

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  3. बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (19 -06-2013) के तड़प जिंदगी की .....! चर्चा मंच अंक-1280 पर भी होगी!
    सादर...!
    शशि पुरवार

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  4. खूबसूरत बिम्ब...

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  5. बहुत ख़ूबसूरत...

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